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AjaySingh


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राम या राज!

Posted On: 21 Sep, 2014  
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मोदी गच्चा खा गए!!!!

Posted On: 18 Sep, 2014  
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Bechare Namo niya wale….!

Posted On: 9 Mar, 2014  
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नेता राग और लालू प्रसाद !

Posted On: 30 Sep, 2013  
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दोगलापन या राजनैतिक कला!

Posted On: 30 Sep, 2013  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

श्रीमान जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद!  यहीं पर तो गलती हो गयी. सीमाएं रेखांकित न होना,शक्ति संतुलन,आतिथ्य की मर्यादा आदि सब की जिम्मेदारी मोदी जी की ही हो गयी और शी पिंग की? क्या विदेशी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्वाभिमान से अधिक महत्वपूर्ण हो गया? क्या आप चीन की सैनिक गतिविधियों की टाईमिंग पर ध्यान नही दे  रहे हैं? विकास की ये भूख  बहुत खतरनाक है. चीन यही जानना चाहता था कि हमारी भूख कितनी है ! मात्र आपत्ति दर्ज करना और बिना असर देखे आवभगत जारी रखना हमारी कूटिनीतिक कमजोरी को ही प्रदर्शित किया . हमें दिखाना था कि जितना हमें उनकी जरूरत है ुउससे अधिक उन्हे हमारी जरूरत है.

के द्वारा: ajaykumarsingh ajaykumarsingh

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के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

मुंबई।। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि असीम की गिरफ्तारी बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला है। पुलिस के इस कदम ने असीम के 'अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार' का उल्लंघन किया है। वकील संस्कार संस्कार मराठे द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डी वाइ चंद्रचूड और जस्टिस अहमद सय्यद की बेंच ने कहा, 'पुलिस कैसे ऐसे तुच्छ आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है? आप एक कार्टूनिस्ट को अरेस्ट कर उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।' . अब यहां पर ईस छोटी बात पर अपने तुच्छ विचार रखने की जरूरत नही.

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धन्यवाद तेजवानी जी,    लेख शानदार हो न हो , इसकी भावनाओं की कद्र जरूर करें। ये हमारी सौभाग्य की बात है कि हमारे समय में अरविन्द जैसा नौजवान है जो इतना त्याग और संघर्ष कर रहा है।    एक धोबी द्वारा की गई आलोचना के प्रभाव में ही राम जैसा राजा  भी विवादित कार्यवाही करते हुए सीता को वन में भेज दिये। जब कोई अच्छा विचारक किसी की आलोचना करेगा तब क्या हो सकता है। ये आलोचकों द्वारा उठाया गया शोर था कि अन्ना टीम में अल्पसंख्यक एवं दलित वर्ग की भागेदारी नहीं है जिसके प्रभाव में अरविन्द जी को इमाम बुखा़री जैसे धूर्त के यहां दौड़ लगानी पड़ी और अन्ना को दलित वर्ग की बालिकाओं की व्यवस्था करनी पड़ी अपना अनशन तोड़ने के लिये। दिखावा करने के ये दोनों  कद़म मुझे ठीक नहीं लगे किन्तु यदि हम इन लोगों की शक्ति नहीं बढ़ाएगें तो इन्हे ऐसे सस्ते कद़म  उठाने पड़ेंगे। 

के द्वारा: Ajay Singh Ajay Singh

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भूपेन्द्र जी नमस्कार,   टिप्पणी के लिये धन्यवाद्। आखिर हम कब तक अपनों को ही संदेह की दृष्टि से देखते रहेंगे!  बाबा रामदेव के  आन्दोलन मे आधी रात में पुलिस द्वरा पूर्व के की गई लाठी चार्ज की कायराना और मूर्खतापूर्व कार्यवाही की जो आलेचना हुई और मा.न्यायालय ने भी जिसकी भर्तसना की उसी के प्रभाव थी कि इस आन्दोलन में प्रशासन का आत्मविश्वास डगमगाया था। ये भ्रष्ट राजनैतिक दल न तो अन्ना टीम के हैं और ना ही बाबा रामदेव के। आप किसकी पदलोलुपता की बात कर रहे हैं? जो पद पाने  का युवाओं का सपना होता है उस पद को अरविन्द और किरनबेदी कभी का ठोकर मार चुके हैं। मित्र अवसर बार बार दस्तक नहीं देता, ऐसे अगुआ समाज मे बहुत नहीं हैं। थोड़ा विश्वास करना भी एक बड़प्पन है। आपका साथ ही इनकी शक्ति है।इनकी सफलता मे ही हमारा आपका और देश का हित है। 

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श्री जे.एल.सिंह जी नमस्कार,  सच में बहुत दुःख होता है जब कुछ लोग मात्र ध्यान आकृष्ट करने के या अपनी विद्यवत्ता दिखाने के लिये बिना सिर पैर की आलोचना करने लगते हैं। जिन लोगों के पास अपने गांव-मुहल्ले या कालोनी के 10  लोग को भी संगठित करने की कूबत नहीं है वो लोग अन्ना,केजरीवाल या रामदेव जी के आन्दोलन में भाग लेने वालों की गिनती करते हैं। अन्ना,अरविन्द,किरनबेदी आदि जो त्याग कर चुके हैं वो इन आलोचकों को नहीं नज़र आता किन्तु ये काल्पनिक महात्वाकांक्षा आदि के साक्षात दर्शन कराते हैं।     बस हमें चुप नहीं रहना है और हम जहां है वहीं से इस आन्दोलन का साथ देना है। धन्यवाद्!    

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