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कांग्रेस पर  देशद्रोह का केस क्यों नहीं?

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क्या इन भेड़ियों के चेहरों से राष्ट्रीय चिन्ह का सम्मान बढ़ रहा है?

क्या इन भेड़ियों के चेहरों से राष्ट्रीय चिन्ह का सम्मान बढ़ रहा है?

असीम त्रिवेदी का सरकारी पोस्टमार्टम करने के बाद भी उनमे ऐसी कोई गांठ नहीं मिली की उन्हे देशद्रोही का रोगी सिद्ध किया जा सके।उनके विरुद्ध मात्र एक आरोप ही पाया जा रहा है वो है राष्ट्रीय प्रतीक के अपमान का।उन्होने अशोक की लाट से मिलता जुलता कार्टून वर्तमान भ्रष्टाचार पर व्यंग करते हुए बनाया था।यदि राष्ट्रीय प्रतीक की तरह का कोई कार्टून बनाना देशद्रोह है,देश का अपमान है तो कांग्रेस पार्टी  के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होती है? सर्वाधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक तिरंगा को थोड़ा बदल कर कांग्रेस अपने राजनैतिक कारोबार के लिये वर्षों से दोहन/इस्तेमाल/use कर रही है यदि ये तिरंगा पहले कांग्रेस पार्टी का ही प्रतीक था तो इसे अपने हित के लिये राष्ट्रीय प्रतीक क्यों बना दिया गया?देश के संसाधनों का बंदरबांट कर के माल स्विस बैंकों मे भेज देना क्या देश द्रोह नहीं है?
बोफोर्स दलाली काण्ड, जैसे देश की सुरक्षा से सम्बंधित मामले में भ्रष्टाचार करके कांग्रेस ने देशद्रोह नहीं किया है?
बाकी बहुत से कारण हैं जिससे कांग्रेस पार्टी का देशद्रोही स्वरुप दिखायी देता है, आशा है पाठक बन्धु भी
इन कारणों पर प्रकाश डालेंगें।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashishgonda के द्वारा
September 12, 2012

आदरणीय! बिलकुल ठीक प्रश्न……..हमें भी जवाब की प्रतीक्षा रहेगी..अब कांगेस के ऊपर जनता को करना चाहिए मुकदमा.

    ajaykumarsingh के द्वारा
    September 12, 2012

    धन्यवाद्.

bharodiya के द्वारा
September 12, 2012

-कम से कम ईस केस में मै सरकार का दोष नही देखता । सरकार ऐसी छोटी बात पर अन्ना के आदमी को हिरो बनने का मौका नही देती । ये लोकपाल विरोधी आरपीआई के कार्यकर्ता की करतूत है । उस ने ही फरियाद दाखल की है । आप को याद होगा की अन्ना के मुंबई के अनशन के समय काले झंडे और अन्ना पर पथराव किया गया था । ये उन लोगों का ही काम है । दलित नेताओं ने उन में ईतनी घबराहट फैला दी है की यदी लोकपाल आया तो उस का बूरा प्रभाव उन लोगों पर ही पडेगा । क्यों की सरकारी नौकरी उन को ही करनी है ।

    ajaykumarsingh के द्वारा
    September 12, 2012

    नमस्कार भरोडिया जी, प्रतिक्रिया के लिये के लिये धन्यवाद,  जो भी हो किन्तु मात्र एक फरियाद पर बिना जांच किये देशद्रोह की धारा थोपना क्या सरकार की मू्र्खता नहीं थी!  देशद्रोह हत्या,बलात्कार से भी बड़ा अपराध होता है।इस धारा का प्रयोग अत्यंत सावधानी पूर्वक होना चाहिये। या तो किसी पर देशद्रोह की धारा के अन्तर्गत कानूनी कार्यवाही नही होनी चाहिये और यदि किसी पर इस धारा के अन्तर्गत कार्यवाही प्रारम्भ हो तो उसे इतनी आसानी से बरी भी नही करना चाहिये। इस कानून का दुर्पयोग इसे मूल्यहीन कर देगा।


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