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तेरा ज़मीर ,तेरी आत्मा तुझे धिक्कारती है तो ....

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तुम मेरी रैली मे आओ ,नारे लगाओ , मेरे कहने पर हड़ताल करो ,पुलिस की लठियाँ खाओ । हमारे लिए अपने भाइयों से लड़ो, उनका सर फोड़ो, उन्हे गालियां दो। हम तुम्हें मंदिर देंगे या हम तुम्हे सांप्रदायिक ताकतों से बचाएँगे।
तुम हमे सिर्फ वोट दो फिर पाँच साल तुम्हें डिस्टर्ब नहीं करेंगे।

क्या ???? तुमने कुछ कहा? चुप्प तू मेरी प्रजा है जनता नहीं, तेरी हिम्मत कैसे हुई कि तुम हमारा हिसाब – किताब पूछो? अरे हम सब मे कोई दुश्मनी नहीं है .हम सब कांग्रेस ,भाजपा ,सपा ,बसपा ,जेडी फेडी सब एक हैं। तुम लोग हम लोगों मे से ही किसी का झण्डा उठाओ और जो कहा वो करो। तेरी इतनी हिम्मत कि आर.टी .आई के नीचे हमको आने को कहे? जन लोकपाल कि मांग करते हो ,अपनी औकात मे रहो, पता है कानून हम बनाते हैं , कानून हम से ऊपर कैसे हो सकता है? चल तू बहुत बोलता है, तुझे कुछ टुकड़ा मिल जाएगा, बस मेरे पक्ष मे भूँकता रह और आम आदमी वालों से लड़ और फिर हमारी विरादरी को कानून के नीचे और जवाबदेही के लिए सोचना भी नहीं बस गुलामी कर।

नहीं मानता है? ठीक है ,तेरा ज़मीर ,तेरी आत्मा तुझे धिक्कारती है तो जा, जाकर आम आदमी पार्टी का झण्डा उठा जो तुझे मालिक और खुद को सेवक समझती है, जो तेरे प्रति जवाबदेही का कानून लाने कि बात करती है।

जनलोकपाल लाने की बात करती है,वोट देने के बाद भी नेता को वापस बुलाने की बात करती है। तुमसे पूछ कर पैसा खर्च करने की बात करती है। अगर तुझे हमारी गुलामी मे मज़ा नहीं आरहा है तो जा स्वराज के लिए मर।

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