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मोदी गच्चा खा गए!!!!

Posted On: 18 Sep, 2014 Others,Junction Forum,Politics में

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चाइना की सोची समझी चाल में मोदी गच्चा खा गए। चाइना ने अपने प्राइम मिनिस्टर की दौरे के समय ही न सिर्फ सीमा का अतिक्रमण किया वरन तम्बू गाड़ के जम गए। हमारे सैनिकों को भी घेरने का अपमानजनक कृत्य किया। उनका मकसद होगा की देखा जाये ये अपने को तेज तर्रार दिखाने वाले में वास्तविक दम कितना है,कुटनीतिक परिपक्वता कितनी है! इसके साथ ये भी साबित किया जाये कि हम (चाइनीज) तुम्हे बराबर का नहीं मानते हैं और कोई भी विवादित मुद्दा बातचीत में उठाने की हिम्मत ना करें या उसे औपचारिकता से आगे बढाने की हिम्मत ना करें।
मोदी यहीं गच्चा खा गए। अगर वे सारे निर्धारित कार्यक्रम को रद्द करके झीं पिंग को पहले अपने सेना वापस करने को कहते और इसके बाद फिर उन्हें नाच गाना दिखाते ।यदि आग्रह से चीनी सेना वापस नहीं जाती तो ये दौरा बीच में ही रद्द कर देते । ये दोनों कदम चीन की चाल को चीन के लिए आत्मघाती साबित कर देते। चीन को लेने के देने पड़ते। चीन की अंतर्राष्टीय क्षवि को जितना आघात पहुँचता इंडिया का क्षवि उसकी दोगुना मजबूत होती। लेकिन ओह!!!!!



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
September 21, 2014

आदरणीय सिंह साहब ! आपको पढ़ा आपत्ति विचारणीय लगी | चीनी सेनाओं की वापसी के बाद ही बातचीत किये जाने का आपका परामर्श देश की १२७ करोड़ जनता को उन्नत मस्तक होने का गौरव प्रदान करता हो किन्तु जहाँ सीमाएं रेखांकित न हो , शक्ति संतुलन प्रेरणा हो, आतिथ्य की मर्यादा हो और इन सबसे ऊपर विविद विवादों से बचते हुए विकास मूल मंत्र वहां मोदी जी द्वारा उठाया गया हर एक कदम, “हरेक मसले पर स्तिथि परक रूबरू आपत्ति दर्ज करना मोदी जी की गलती कैसे हो सकती है. देश के प्रति सबके मन मैं आप जैसे भाव आना स्वाभाविक है |

    ajaykumarsingh के द्वारा
    September 21, 2014

    श्रीमान जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद!  यहीं पर तो गलती हो गयी. सीमाएं रेखांकित न होना,शक्ति संतुलन,आतिथ्य की मर्यादा आदि सब की जिम्मेदारी मोदी जी की ही हो गयी और शी पिंग की? क्या विदेशी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्वाभिमान से अधिक महत्वपूर्ण हो गया? क्या आप चीन की सैनिक गतिविधियों की टाईमिंग पर ध्यान नही दे  रहे हैं? विकास की ये भूख  बहुत खतरनाक है. चीन यही जानना चाहता था कि हमारी भूख कितनी है ! मात्र आपत्ति दर्ज करना और बिना असर देखे आवभगत जारी रखना हमारी कूटिनीतिक कमजोरी को ही प्रदर्शित किया . हमें दिखाना था कि जितना हमें उनकी जरूरत है ुउससे अधिक उन्हे हमारी जरूरत है.

    ajaykumarsingh के द्वारा
    September 21, 2014

    मेरे ये विचार देश प्रेम या राष्ट्रवाद से प्रेरित ना हो कर शुद्ध रूप से मनोविज्ञान और कूटिनीति पर आधारित हैं.


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